केरल 56 साल के व्यक्ति के अन्दर एक बीमारी मिली जिसका नाम Lyme Disease है हालांकि यह बीमारी हमारे देश में बहुत ही कम पाया जाता है लेकिन अमेरिका जैसे देशों में यह बीमारी बहुत आम है। इस बीमारी का अगर सही समय पर इलाज न किया गया तो ये हमारे दिल, दिमाग और घुटनों पर काफी असर डालती है।

लाइम डिजीज क्यों होता है?
भारत में यह बीमार रेयर मानी जाती है यह बीमारी एक बैक्टीरिया के द्वारा फैलती है। इस बैक्टीरिया का नाम बोरेलिया बर्ग डोरफेरी है यह बैक्टीरिया छोटे पशुओं जैसे चूहा हिरण जैसे पशुओं में पाया जाता है। इनमें यह इक्सोडेस टिक के काटने से होता है।

इसे डियर टिक भी कहा जाता है ये डियर टिक जब किसी व्यक्ति को काटते हैं तब ये बैक्टीरिया उन व्याक्तियों के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इस बीमारी का लाइम डिज़ीज नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह बीमारी USA के गांव में पहली बार पाया गया था इसलिए इसका नाम लाइम डिज़ीज पड़ा
लाइम डिज़ीज होने के लक्षण
लाइम डिज़ीज के 300 से ज्यादा लक्षण हो सकते है। इसलिए इसका “ग्रेट मिमिकर” नाम पड़ा।
टिक के काटने से उस जगह रैश हो जाता है। और यह धीरे-धीरे बढ़ता है और कभी कभी 12 इंच तक पहुंच जाता है।

कमाल की बात यह है कि इसमें न तो दर्द होता है और न ही खुजली। लेकिन इस बीमारी में बुखार, ठंड लगना, बदन और सिर दर्द होता है
Lyme Disease बीमारी में दिल की धड़कन की समस्या आ जाती है भौर घुटनों में दर्द और उनमें सूजने की दिक्कत भी होने लगती है। इसके अलावा ब्रेन से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती है।
लाइम डिज़ीज बीमारी से बचाव और इलाज।
जिन व्याक्तियों में लाइम डिज़ीज के लक्षण होते हैं उनके खून में एन्टी बॉडी टेस्ट किया जाता है डायग्नोसिस के बाद इसका उपचार साधारण एंटीबायोटिक्स से ही होता है।
जैसे – एजिथोमाइसिन,डाक्सीसाइक्लिन, सेफुरोक्साइम etc
ये एंटीबायोटिक्स शुरुआती स्टेज में ही काम करते है अगर किसी मरीज के क्रोनिक लाइम डिज़ीज है तो ये ज़्यादा काम नही करेंगे।
इस बीमारी से बचने के लिए लम्बी बांह के कपड़े पहने।
बाहर से आने के बाद तुरंत नहा लें।
कोई टिक शरीर में चिपका न रहे अगर चिपका रहे तो तुरंत निकाल दें।