भारत को स्पेस एंजेसी (ISRO) एक बार फिर चर्चा में, ISRO ने लांच किया पुष्पक विमान।

ISRO का यह विमान Reusable पुष्पक व्हीकल हैं यानी इसे पृथ्वी पर लाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है।
पुष्पक विमान को Single stage to orbit vehicle की कैटेगरी में रखा गया है हैरानी वाली बात यह है कि इस राकेट का पुष्पक नाम रामायण के पुष्पक विमान से प्रेरित होकर रखा गया है। 100 करोड़ की लागत से बनाये गये पुष्पक विमान पर साल 2016 से काम चल रहा था और अब जाकर ISRO को इसमे सफलता हासिल हुई है ऐसा कहा जा रहा है कि भविष्य में पुष्पक राकेट का इस्तेमाल स्पेस में चक्कर लगा रही सेटेलाइट्स की Refueling करने के लिए और स्पेस की गंदगी को कम करने लिए किया जा सकता है।

कहां पर हुआ इसका परीक्षण?
इसरो के पुष्पक विमान का परीक्षण रेख कर्नाटक के चित्रदुर्ग मे बने एरोनाटिकल टेस्ट रेन में किया गया परीक्षण के दौरान पुष्पक विमान को एयरफोर्स के हेलीकाप्टर के जरिए आसमान से नीचे गिराया गया था इस परीक्षण के दौरान पुष्पक आटोमेटिक तरीके से रनवे पर लैंड हुआ पुष्पक रॉकेट की ये तीसरी फ्लाइट थी 2016 में इसका पहला परीक्षण किया गया था तब इसे बंगाल की खाड़ी में एक वर्चुअल रनवे पर लैंड कराया गया था दूसरा परीक्षण 2023 में हुआ तब इसे लैंडिंग के लिए चिन्नूक हेलीकाप्टर Drop किया गया था और अब एक बार फिर कर्नाटक के चित्रदुर्ग मे पुष्पक विमान को सफलतापूर्वक लैंड करवाया गया है।

पुष्पक विमान की खासियत।
पुष्पक विमान 6.5 मीटर लम्बा और 1.75 टन वजन के साथ एरोप्लेन जैसा स्पेसक्राफ्ट राकेट है इसे स्पेस में भेजने के लिए तैयार किया गया है।

ये दूसरे राकेट के जैसा स्टेज के साथ अंतरिक्ष में भेजा जा सकता है राकेट को पुष्पक नाम रामायण में जिक्र किये गये पुष्पक विमान से मिला है और इसका इस्तेमाल आगे चलकर चक्कर लगा रही सेटेलाइट्स और तमाम ऐसे कामों के लिए किया जाएगा जिससे भारत की ताकत और बढ़ेगी ।