वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के फाइनल में D Gukesh ने रचा इतिहास

भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने सिंगापुर में वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब जीतकर ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है D GUKESH महज 18 साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनकर उन्होंने पूरे देश को गर्व करने का मौका दिया है उनका कारनामा इस मायने में भी अहम है कि उनसे पहले भारत के लिए केवल विश्वनाथन आनंद यह टाइटल जीत चुके थे।

वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के फाइनल में D Gukesh ने रचा इतिहास
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शतरंज के महारथी बने डी गुकेश

डी गुकेश ने यह ताज 14 कड़े गेम के बाद हासिल किया 13वें गेम तक उनके और चीन के डिफेंडिंग चैंपियन डिंग लिरेन के बीच मुकाबला बराबरी पर था 14वें गेम में भी ऐसी सिचुएशन बन गई थी, जहां लग रहा था कि यह बाजी भी ड्रॉ रहेगी और दोनों खिलाड़ियों को फिर से भिड़ना पड़ेगा लेकिन लिरेन की एक गलती उन पर भारी पड़ी और गुकेश ने दिखाया कि उन्हें प्रतिद्वंद्वी की गलत चालों का इस्तेमाल अपने हक में करना आता है।

D GUKESH ने भारत का सर गर्व से ऊंचा कर दिया

गुकेश की उपलब्धि को किस तरह आंका जाए शायद यह सवाल बहुतों को मथ रहा होगा क्रिकेट को धर्म की तरह मानने वाले इस देश में दूसरे खेलों के साथ अक्सर यह संकट आता है तो गुकेश ने जो मकाम हासिल किया है उसकी चमक किसी विश्व कप या ओलंपिक्स के किसी गोल्ड मेडल से कम नहीं, बल्कि उससे अधिक ही आंकी जाएगी पहली बार इतनी कम उम्र के किसी खिलाड़ी ने शतरंज पर इस तरह की महारथ हासिल की है यह जादू इससे पहले गैरी कैस्परोव ने किया था लेकिन तब वह 22 साल के थे।

भारत के चेस Hero बने डी गुकेश

भारतीय शतरंज की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरे हैं गुकेश। और सबसे बड़ी बात है कि अपने छोटे-से करियर में वह समय-समय पर अपनी प्रतिभा की झलक दिखलाते रहे हैं जब महज 17 दिनों से वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने से चूक गए थे तभी से इस दिन का इंतजार शुरू हो गया था कि कब वह विश्व शतरंज चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम करेंगे।

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हर महान उपलब्धि मेहनत और जुनून मांगती है गुकेश को करीब से देखने वाले जानते हैं कि उन्होंने चेस बोर्ड को इससे कहीं बढ़कर दिया उनके तैयारी करने का ढंग हो या एकाग्रता, तारीफ उनके विरोधी खिलाड़ी भी करते रहे हैं तभी तो खिताबी चूक के बाद भी लिरेन अपनी हार से ज्यादा गुकेश की जीत पर बात करने से खुद को रोक नहीं पाए।

डी गुकेश कौन है?

डी गुकेश भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर हैं वह “ग्रैंडमास्टर” ख़िताब हासिल करने वाले इतिहास में तीसरे सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं डी गुकेश 18 साल की उम्र में शतरंज विश्व चैंपियन बनने वाले सबसे युवा खिलाड़ी है इनका जन्म 6 मई 2006 को हुआ।

डी गुकेश के पिता का नाम रजनीकान्त एक ई.एन.टी. सर्जन हैं और उनकी माँ पद्मा एक सूक्ष्म जीवविज्ञानी हैं उन्होंने सात साल की उम्र में शतरंज सीखा। वे वेलमाला विद्यालय मेल अयनाम्बक्कम चेन्नई में पढ़ते हैं। 

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